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Pancha Avatars Of Mahanubhava Pantha | Dandvat

🙏 दंडवत प्रणाम
नमो पंच कृष्ण अवतार



💌 Leelas

नमो पंच कृष्ण अवतार - Read the leelas of Mahanubhava Pantha. Go to Leelas

दंडवत या शब्दाचा अर्थ काठि प्रमान...

🙏 दंडवत प्रणाम 🙏

जय श्री चक्रधर स्वामी जी
🌸 दंडवत या शब्दाचा अर्थ काठि प्रमाने संपुर्ण शरणागती
🌸 दंडवत हा शब्द प्राचीन ग्रंथ रचनेत सुद्धा आला आहे
🌸 दंडवत दोन प्रकारे केल्या जातो ,एक वाचिके कायाप्रणीत कंबरेपासुन वाकुन दंडवत बोलने
🌸 दुसरा दंडवत संपुर्ण शरीर जमीनीवर काठिवत् टाकने
🌸 लीळाचरीत्रात बाईसा राशी दंडवत् घालत होत्या स्वामींच्या दर्शनाला आलेले भक्तजन पाच दंडवत घालुन श्रीचरणी लागत, स्वामी चांगदेव भटाला रिद्दपुरला गेल्यावर घाला घाला दंडवत म्हटले
🌸 आपण सुद्दा स्थानाला गेल्यावर प्रथम बाहेर पाच दंडवत घालुन त्या स्थानाची लीळा आठवावी,नंतर हात सोवळे करुण स्थान वंदन करावे पुनश्च संपुर्ण विधी झाल्यावर दंडवत घालुन मंदिराच्या बाहेर पडावे
🌸 दंडवत घातल्याने जीव स्वरुपी आलेला आसळगै ,पातलेपणा निघुन जातो व साधक विधी करण्यास दक्ष होतो
🌸 दंडवताने रोग नाहिसे होतात ,कारण दंडवत हा एक ऊत्तम व्यायाम आहे,वाय,कफ,पित्त बाधत नाहित
🌸 दंडवत घालताना लीळाचरीत्रातील दंडवताच्या लिळा आठवल्याने जीव स्वरुपाची योग्यता वाढते ईत्यादि अनेक फायदे आहेत
🌸 परमेश्वराच्या सर्व साधकाने एकमेकांना भेटल्यावर वाकुन ,नम्रतेने ,श्रद्धेने आवडिने दंडवत केला तर स्वामी भेटलेयाचे गोमटे होते

🙏 जय श्री कृष्ण जी 🙏
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हमारे पांचो अवतारों का जन्म स्थान...

🙏 दंडवत प्रणाम 🙏

|| भगवान श्री कृष्ण ||
जन्म स्थान : मथुरा बन्दी गृह (जेल) (उत्तर प्रदेश) में
जन्म का समय : श्रावण कृष्ण पक्ष अष्टमी रात्रि १२ बजे (बुधवार)

|| श्री दत्तात्रेय महाराज ||
जन्म स्थान : बद्रिकाश्रम उत्तराखंड (हिमालय)
जन्म का समय : मार्गशीष शुक्ल पक्ष चतुर्दशी प्रातः ४ बजे (शुक्रवार)

|| श्री चक्रपाणी महाराज ||
जन्म स्थान : फल्टन जिला सातारा (महाराष्ट्र)
जन्म का समय : आशिवन कृष्ण पक्ष नवमी सुबह ५ बजे (वीरवार)

|| श्री गोविन्द प्रभु महाराज ||
जन्म स्थान : काटसुर (रिध्पुर) महाराष्ट्र
जन्म का समय : भाद्रपद शुक्ल पक्ष त्रयोदशी रात्रि १० बजे (मंगलवार)

|| सर्वज्ञ श्री चक्रधर स्वामी ||
जन्म स्थान : भरोच, (गुजरात)
जन्म का समय : भाद्रपद शुक्ल पक्ष द्वितीय दोपहर २ बजे (शुक्रवार)

🙏 जय श्री कृष्ण जी 🙏
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एक दिन महदाइसा ने श्री चकर्धर स्व...

🙏 दंडवत प्रणाम 🙏

सर्वज्ञ श्री चक्रधर स्वामी जी ने उत्तर दिया, महदाइसा! जब भगवन श्री कृष्ण जी राजा कंस का वध करके कारागर की ओर जाने लगे तो वहा देखा की उद्धव देव भयभीत स्तम्भ के पीछे खड़े थे।
श्री कृष्ण जी ने उन्हें छिपा देख कर कहा, अरे! वहा कूँ खड़ा है। उतर देते हुए अन्य सेवक ने कहा। प्रभु जी वहा पर राजा कंस के प्रधान मंत्री है। तत्काल उद्धव ने कहा, प्रभु जी में अपनी बुद्धि से कुछ मंत्रणा कंस के समुख रखा करता था। तब प्रभु जी ने कहा, आपने आजतक कंस का अमात्यतव सवीकारा था, अब आजसे आप हमारा मंत्रितब धारण करो ओर हमे मंत्रणा दिया करो।
प्रभु जी के इन्ही वचनों के साथ उद्धव देव को प्रेम संक्रमण हुआ ओर उन्होंने प्रभु जी को सहस्तांग दंडवत प्रणाम कर, खुदको धन्य माना|

🙏 जय श्री कृष्ण जी 🙏
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जब महादाईसा जी वाराणसी पहुंची | उ...

🙏 दंडवत प्रणाम 🙏

जय श्री चक्रधर स्वामी जी
जब महादाईसा जी वाराणसी पहुंची तब क्या देखती हैं कि यहां का पानी भी अन्य स्थानों की तरह ही है! कोई विशेष नहीं! बहुत पछतावा कर दादोस के कारण दुखी हो रही थी! मन को समझा कर उन्होंने गंगा में स्नान किया! सबसे पहले दादोस को तिलांजलि दी! फिर अपने परिवार और गोत्र को भी तिलांजलि दी! इसके बाद स्नान कर बाजार आई और अत्यंत दुर्बल नंगे व्यक्ति को भोजन करवाया! उस व्यक्ति को अधिक भूख लगी थी तो वह अतिरिक्त दो लोगों का भोजन भी खा गया! उसके जाने के बाद महादाईसा जी रिद्धपुर के लिए निकली!

यहां से भगवान की ने बाईसा माताजी और नागदेव की को भी परमेश्वर पुर भेजा हुआ था! वे श्री गोविंद प्रभु जी के दर्शन कर वापिस श्री चक्रधर स्वामी जी के पास चलपड़े! भगवान से उन्हें माईतया के घर भेंट हुई!

बोलिए श्री चक्रधर स्वामी जी की जय
।। श्रीचक्रधरार्पणम् ।।

🙏 जय श्री कृष्ण जी 🙏
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प्रातः काल का पूजा अवसर हो जाने क...

🙏 दंडवत प्रणाम 🙏

जय श्री चक्रधर स्वामी जी
एक दिन भगवान जी प्रातः काल का पूजा अवसर हो जाने के बाद छिन्नस्थली विहरण के लिए गए! वहां से सिंह नारायण के मंदिर में आकर आसन पर बैठे! इतने में ही इन्द्रभट्ट आए और सम्मुख बैठ गए! उन्हें भोजन के लिए नियंत्रण देना था किंतु याद ही नहीं रहा! आसमान में बादल देखते ही महाराज ने संकेत किया कि इन्द्रभट्ट तुम शीघ्र अपने घोगर गांव चले जाओ अन्यथा भीग जाओगे!

इन्द्रभट्ट बचते हुए जैसे ही गांव पहुंचे वैसे ही बारिश शुरू हो गई! इधर भक्तजन कपड़े का चंदोवा बना कर भगवान जी के ऊपर लगा चलने लगे! कभी जानबूझ कर लीला के हेतु से महाराज पीछे रह जाते तो कभी आगे निकल आते! जब तक भक्तजन चांदोवा आगे पीछे करते तब तक महाराज भीग जाते! इस प्रकार उनके वस्त्र गीले देख रेइनायक के घर से दूसरे वस्त्र मंगवाए गए! सभी भक्तों ने भी राजमठ वापिस लौट कर दूसरे वस्त्र धारण किए!

बोलिए श्री चक्रधर स्वामी जी की जय
।। श्रीचक्रधरार्पणम् ।।

🙏 जय श्री कृष्ण जी 🙏
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श्री गोविन्द प्रभु महाराज जी के द...

🙏 दंडवत प्रणाम 🙏

गोविन्द प्रभु भगवान जी के अवतारोत्सव पर हम जितने पदार्थ बनने में सक्षम है उतने पदार्थ बना का प्रभु जी को को भोग लगाना चाहिए।
1 - लाख की भाकर, गुड़ की रोटियां, दलिया
2 - दही दूध और माखन, श्री खंड, गुलाब जामुन
3- पकोड़े (बुड़ुदे), धिडरे (बेसन से बना हुआ पुडा), काजू
4 - गुड़, गुड़ और भुने चने, कच्चे ज्वार के दाने
5 - देसी घी, मक्खन, गुड़ और देसी घी से बनी सेवइयां
6 - मीठी ककड़ी, दही भल्ले, खीर
7 - बैंगन की सब्जी, साग
8 - तरबूज, बेर, संतरे, आम का रस
9 - आउसा जी का प्रसिद्ध हलवा

इत्यादि पदार्थ भगवान जी को अच्छे लगते थे।

🙏 जय श्री कृष्ण 🙏
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