प्रातः काल का पूजा अवसर हो जाने के बाद छिन्नस्थली विहरण | उत्तरार्ध लीला क्रमांक 203 | लीला चरित्

  • Author: Dandvat
  • Posted on: 2023-12-24 18:00:00
  • Tags: Leela, Shree Chakrdhar Swami, Panch Krishan Avatar
  • Post ID: 1703421000

🙏 दंडवत प्रणाम
नमो पंच कृष्ण अवतार



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नमो पंच कृष्ण अवतार - Read the leelas of Mahanubhava Pantha. Go to Leelas

श्री गोविन्द प्रभु महाराज जी के द...

🙏 दंडवत प्रणाम 🙏

गोविन्द प्रभु भगवान जी के अवतारोत्सव पर हम जितने पदार्थ बनने में सक्षम है उतने पदार्थ बना का प्रभु जी को को भोग लगाना चाहिए।
1 - लाख की भाकर, गुड़ की रोटियां, दलिया
2 - दही दूध और माखन, श्री खंड, गुलाब जामुन
3- पकोड़े (बुड़ुदे), धिडरे (बेसन से बना हुआ पुडा), काजू
4 - गुड़, गुड़ और भुने चने, कच्चे ज्वार के दाने
5 - देसी घी, मक्खन, गुड़ और देसी घी से बनी सेवइयां
6 - मीठी ककड़ी, दही भल्ले, खीर
7 - बैंगन की सब्जी, साग
8 - तरबूज, बेर, संतरे, आम का रस
9 - आउसा जी का प्रसिद्ध हलवा

इत्यादि पदार्थ भगवान जी को अच्छे लगते थे।

🙏 जय श्री कृष्ण 🙏
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कोणापासुन कोणते शास्ञ निर्माण झाले

🙏 दंडवत प्रणाम 🙏

कोणापासुन कोणते शास्ञ निर्माण झाले ?
(१) परमेश्वराची —ब्रह्मविद्या
(२) मायेचे — चार वेद
(३) विश्वरुपाचे —ञिकांङ वेद
(१) कर्नकांङउपासना
(३) ज्ञानकांङ असे तीन कांङ
(४) अष्टभैरवाने वेदावर अष्टशास्ञ तयार केले
(१) कराळी भैरवाचे —कामशास्ञ
(२) विकराळी भैरवाचे,धर्मशास्ञ
(३) उमापती भैरवाचे, उद्योगशास्ञ
(४) पशुपती भैरवाचे , सांख्यशास्ञ
(५) सदाशिवभैरवाचे, न्यायशास्ञ
(६) ब्रह्मा भैरवाचे—वेदांतशास्ञ
(७) विष्णूभैरवाचे, आगमशास्ञ
(८) महादेवभैरवाचे,निगमशास्ञ
(५) क्षिराब्धिच्यामहाविष्णुपासुन – १४ विद्या
(६) केलासाच्या महादेवापासुन – ६४ कला
(७) वैकुंठीच्या विष्णुचे- मिमासाशास्ञ
(८) ब्रह्नदेवाने -उपनिषद
(९) इंद्राने – कोकशास्ञ
(१०) चिञसेनाची – गायनकला
(११) साबाचे – मंञशास्ञ
(१२) यक्षणीची – कुविद्या
(१३) क्रषीमुनीनी – १८पुराणांची रचना केली
भगवान श्रीचक्रधर स्वामी की जय

🙏 जय श्री कृष्ण 🙏
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स्वामींचा परिवार

🙏 दंडवत प्रणाम 🙏

जय श्री चक्रधर स्वामी जी
स्वामींचा परिवार तीन प्रकार चा होता:
१) दर्शनीय।
२) बोधवंत (ग्यानी पुरूष तथा भक्त)।
३) अनुसरलेला एकून स्वामीचा परिवार १३५ होता। तो येणे प्रमाणे।

भक्त:
१) पैठनची नागुबाई उर्फ बाईसा
२) वरंगलचे माघव भक्त ब्राह्मण।

बोधवंत (ग्यानी पुरूष):
१) श्री नागदेवाचार्य २) शांतबाईसा ३) महादाईसा ४) म्हाइंभट ५) दायंबा
६) देमाईसा ७) छर्दोबा ८) खेईगोई ९) गोईबाई १०) जोनोउपाध्ये
११) नीळभट भांडारेकार १२) नाथोबा १३) चांगदेव भट

अनुसरलेली:
१) भट (नागदेवाचार्य) २) नीळभट ३) शांताबाईसा ४) महादाईसा ५) म्हाइंभट
६) साधा ७) आऊसा ८) आबाईसा ९) नाथोबा १०) पोमाईसा
११) खेईबाईसा १२) गोईबाईसा

दर्शनीय:
१) रामदेव विद्यावंत वडनेतर २) सारंग पंडित ३) इंद्रभट ४) संतोष ५)अवडळभट
६) अवघूत ७) मार्तंड ८) परसनायक ९)प्रद्न्यासागर १०) माइताहरी
११)घुईनायक १२) रेनाईक १३) गदोनायक १४) पद्मनाभी १५) नागदेव उपाध्ये
१६)राके लक्छमींद्रभट १७) काकोस १८)आनो १९) खळो २०) गोंदो
२१) जपिय विष्णुभट २२) भ्रिंगी २३) वैजोबा २४) काळदासभट २५)वामन
२६) मतिविळासभट २७) नागनायक (डोमेग्राम) २८) भाईदेव २९) उपासनीये ३०) काळबोटे
३१) साईदेव ३२) कान्हो उपाध्ये ३३) काळेवासनायक ३४) गोरे जानोपाध्ये ३५) एकाईसे दोन
३६) देमाईसा ३७) लखुबाईसा ३८) सोभागा ३९) यल्हाइसा ४०) भूतानंद
४१) सामकोसे ४२) ललीताइसा ४३) एकाविराबाईसा ४४) द्रविळाबाईसा ४५) रत्नमाणिका
४६) आबयो ४७) माळी (वडेगाव) ४८) कमळनायक ४९) राणाइसा (रामदेव विद्यावंताची माता) ५०) तथा रामदेवाची शिष्या राणाइसा
५१) वामदेव पैठणकर ५२) बोनुबाया ५३) मेहकरकर बोनु बाइया ५४) प्रंपच विस्मृति घाटे हरिभट ५५) तिवाडी
५६) तथा त्याची पत्नी ५७) ग्रह सारंगपाणी ५८) तथा त्याची माता ५९) महादेव पाठक ६०) महादेव रावसगावकर
६१) तिकवनायक हिरवळीकर ६२) वायनायक रावसगावकर ६३) राहिया (पाटोदा) ६४) गोविंदस्वामी ६५) सारस्वत भट बीडकर
६६) कनासीचा ब्राह्मण ६७) सिंदुर्जनाचा ब्राह्मण ६८) मोसोपवासिनी ६९) राघवदेव ७०) कुंडी कनहरदेव
७१) महादेवोराजा ७२) पाल्हाडांगिया ७३) कास्त हरिदेव पंडित ७४) गोपाळ पंडित पारधी निरोपनीचे ७५) साळीवाहन
७६) राऊत दोघे ७७) मातंग ७८) देईभट तांबुळ ग्रहनीचे ७९) भोग नारायण माय धुवा ८०) मायधुवा
८१) दाको ८२) गणपत आपयो सराळेकर ८३) सुयराची बाई ८४) गोवारीया ८५) पंचगंगा ब्राह्मण
८६) सुकिये जोगनायक ८७) पाठक ८८) यंत्राकार वासुनायक ८९) भाऊ तिकवनायक ९०) गुर्जर दोन्ही
९१) नागा राऊळ ९२) मुंजिया बहिनी ९३) छायागोपाळीची स्त्री ९४)मार्तंड विहिरीचा ब्राह्मण ९५) पाठक देगाऊबाई
९६) वरंगलकर हंसाबाई ९७) घोगरगावकर बाई ९८) धानाई अळजपुर ९९) रामदरणेयाची माता १००) मुक्ताबीई
१०१) रोहेरीचा ब्राह्मण १०२) भोगनारायण ब्राह्मण १०३) ठाकूर मार्या १०४) मल्ल (जोगवटा दान देणारा) १०५) स्वामींनी ज्याला जोगवटा दिला तो ब्राह्मण
१०६) नारोबा १०७) नांदेड येथील गोरक्छण ब्राह्मण १०८) हेडाऊ (आऊसा जवळील डांगरेस नावाचा कुत्रा स्वामींचा भक्त होता)
।। श्रीचक्रधरार्पणम् ।।

🙏 जय श्री कृष्ण जी 🙏
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जब महादाईसा जी वाराणसी पहुंची | उ...

🙏 दंडवत प्रणाम 🙏

जय श्री चक्रधर स्वामी जी
जब महादाईसा जी वाराणसी पहुंची तब क्या देखती हैं कि यहां का पानी भी अन्य स्थानों की तरह ही है! कोई विशेष नहीं! बहुत पछतावा कर दादोस के कारण दुखी हो रही थी! मन को समझा कर उन्होंने गंगा में स्नान किया! सबसे पहले दादोस को तिलांजलि दी! फिर अपने परिवार और गोत्र को भी तिलांजलि दी! इसके बाद स्नान कर बाजार आई और अत्यंत दुर्बल नंगे व्यक्ति को भोजन करवाया! उस व्यक्ति को अधिक भूख लगी थी तो वह अतिरिक्त दो लोगों का भोजन भी खा गया! उसके जाने के बाद महादाईसा जी रिद्धपुर के लिए निकली!

यहां से भगवान की ने बाईसा माताजी और नागदेव की को भी परमेश्वर पुर भेजा हुआ था! वे श्री गोविंद प्रभु जी के दर्शन कर वापिस श्री चक्रधर स्वामी जी के पास चलपड़े! भगवान से उन्हें माईतया के घर भेंट हुई!

बोलिए श्री चक्रधर स्वामी जी की जय
।। श्रीचक्रधरार्पणम् ।।

🙏 जय श्री कृष्ण जी 🙏
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श्री दत्तात्रेय प्रभुंचे १० वेष

🙏 दंडवत प्रणाम 🙏

श्री दत्तात्रेय प्रभुंचे १० वेष:
१) रूषी वेष
२) बाल वेष
३) मातंग वेष
४) ब्राम्हण वेष
५) गोंधळी वेष
६) कुष्टी वेष
७) व्याघ्र वेष
८) अवधुत वेष
९) पारधी वेष
१०) दिगंबर वेष

शकोणत्या वेषाने कोणाला भेट दिली:
१) रूषी वेष – सहस्त्रार्जुन
२) बालवेष – अनुसूया , पार्वती , लक्ष्मी ,सावित्री
३) मातंग वेष – अर्ळक राजा
४) ब्राह्मण वेष – रेणुकेचा निक्षेप करते वेळेसपरशुरामाला
५) गोंधळी वेष- डखले , चांगदेवभट
६) कुष्टी वेष – सप्त रूषी
७) व्याघ्र वेष – चक्रपाणि महाराज
८) अवधुत वेष – यदुराजा , मदाळसाराणी
९) पारधी वेष – परशुराम
१०) दिगंबर वेष – शंकराचार्य

🙏 जय श्री कृष्ण 🙏
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उत्तरार्ध लीला क्रमांक 205 | लीला...

🙏 दंडवत प्रणाम 🙏

जय श्री चक्रधर स्वामी जी
फिर किसी दिन रात का पूजा अवसर हो जाने के बाद भगवान जी आंगन में शत्पदी करते हुए चांदनी रात की तरफ इशारा करने लगे! भगवान जी की इच्छा थी कि कहीं बाहर घूमने के लिए निकला जाए! बाईसा माताजी जी को कह कर तैयारी करवाई गई! भगवान जी की सवारी के लिए सभी भक्तजन तैयार थे किंतु उनमें से नागदेव जी को घोड़ा बनने के लिए महाराज ने तैयार किया! भगवान जी ने अपने रेशमी वस्त्र को दोनों तरफ से बांध लिया और कमर के पीछे कर राजा की भांति सवार हो गए! सभी के हाथों में लाठी थी! नागदेव जी को भगवान जी ने स्थिति सुख दिया जिसके प्रभाव से वे घोड़े की तरह हिनहिनाते हुए तेज गति से चलने लगे! छिनस्थली गुफा में आकर भगवान जी रुके और भक्तजनों ने अपनी लाठी की मशाल से आरती जलाई! सुंदर पूजा अर्चना कर भगवान जी के लिए आसन बनाया गया! सिंदोले गव्हाण गांव से दूध लाकर भक्तजनों ने भगवान जी को दूध चावल का भोजन करवाया! फिर स्वामी जी ने सभी भक्तों को प्रसाद दिया और वापिस राजमठ लौट आए!

बोलिए श्री चक्रधर स्वामी जी की जय
।। श्रीचक्रधरार्पणम् ।।

🙏 जय श्री कृष्ण जी 🙏
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