पञ्च कृष्ण अवतारों के स्मरण के बाद अपने गुरु का स्मरण

  • Author: Dandvat
  • Posted on: 2023-08-13 18:00:00
  • Tags: Leela, Shree Chakrdhar Swami, Panch Krishan Avatar
  • Post ID: 1691929800

🙏 दंडवत प्रणाम
नमो पंच कृष्ण अवतार



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नमो पंच कृष्ण अवतार - Read the leelas of Mahanubhava Pantha. Go to Leelas

एक दिन महदाइसा ने श्री चकर्धर स्व...

🙏 दंडवत प्रणाम 🙏

सर्वज्ञ श्री चक्रधर स्वामी जी ने उत्तर दिया, महदाइसा! जब भगवन श्री कृष्ण जी राजा कंस का वध करके कारागर की ओर जाने लगे तो वहा देखा की उद्धव देव भयभीत स्तम्भ के पीछे खड़े थे।
श्री कृष्ण जी ने उन्हें छिपा देख कर कहा, अरे! वहा कूँ खड़ा है। उतर देते हुए अन्य सेवक ने कहा। प्रभु जी वहा पर राजा कंस के प्रधान मंत्री है। तत्काल उद्धव ने कहा, प्रभु जी में अपनी बुद्धि से कुछ मंत्रणा कंस के समुख रखा करता था। तब प्रभु जी ने कहा, आपने आजतक कंस का अमात्यतव सवीकारा था, अब आजसे आप हमारा मंत्रितब धारण करो ओर हमे मंत्रणा दिया करो।
प्रभु जी के इन्ही वचनों के साथ उद्धव देव को प्रेम संक्रमण हुआ ओर उन्होंने प्रभु जी को सहस्तांग दंडवत प्रणाम कर, खुदको धन्य माना|

🙏 जय श्री कृष्ण जी 🙏
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सर्वज्ञ श्री चक्रधर स्वामी महाराज...

🙏 दंडवत प्रणाम 🙏

पूर्वार्ध:-
🌸 १) पैठण.. शके ११९०, रवि ०७.१०.१२६८
🌸 २) सिन्नर.. शके ११९१, शनि २६.१०.१२६९
🌸 ३) बिड.. शके ११९२, बुध, १५.१०.१२७०
🌸 ४) जालना.. शके ११९३, सोम ०५.१०.१२७१

उत्तरार्ध:-
🌸 ५) डोमेग्राम.. शके ११९४, शनि २२.१०.१२७२
🌸 ६) नेवासा.. शके ११९५, बुध ११.१०.१२७३
🌸 ७) पैठण.. शके ११९६, सोम ०१.१०.१२७४
🌸 ८) आंबा [शेकटा].. शके ११९७, रवि २०.१०.१२७५

महात्माओं की दीवाली:-
एक दिन महदाइसाने भगवानसे प्रार्थना की, ‘महाराज ! मैं आपकी सेवामें दीवालीका त्यौहार मनाऊँगी।’ भगवानने आज्ञा दी, ‘हमारे साथ महात्मालोगोंकी भी दीवाली मनायी जाये। त्यौहार मनानेका सामान यदि कम हो, तो नागुबाइसासे माँग लो।’

महदाइसाने ‘जो आज्ञा’ कहकर सबको स्नान करानेके लिये संध्याके समय ही पानी भर लिया। उमाइसाके घरसे उबटन, तेल तथा साबुन ले आयी। उस दिन भगवान बहुत सवेरे उठकर शौच आदिसे निवृत्त होकर आसनपर आ बैठे। भक्तलोगोंको भी बैठाया गया। महदाइसाने भक्त तथा भगवानकी आरती उतारी और भगवानको वीड़ा दिया। महदाइसाने भगवानके शरीरपर उबटन मला। उस कटोरीमें और तेल डालकर उसने भक्तोंको दिया। उन्होंने उबटनसे परस्पर एक-दूसरेके शरीरका मर्दन किया। उसने भगवानके सिरपर तेलकी मालिश की। भगवानको ऊँचे चबूतरेपर बिठलाया गया। नारियलके दूधसे उनका सिर धोया गया। भक्तजनोंको भी हरे नारियलका दूध सिरमें लगानेको दिया गया। उन्होंने एक-दूसरेके सिरपर मल लिया। फिर भगवानको जलसे नहलाया गया। महदाइसा पानी डाल रही थी और बाइसाजी सिर तथा शरीरको मल रही थी। भक्तलोग चबूतरेके नीचे खड़े होकर उस पानीसे नहा रहे थे। अंतमें जब भगवानकी श्रीमूर्तिपर पानीकी धार डाली गयी, तो भगवानने दोनों हाथ सिरपर रख लिये। पानी कुहनियोंसे होकर बहने लगा। उस पानीसे भक्तजन नहाये। इस प्रकार भगवान तथा भक्तोंको स्नान करवाया गया ।

शरीरपर बाल अधिक होनेके कारण नागदेवजीको और अलग पानी देकर नहलाया गया। महदाइसाने कुछ वस्तुएँ लेकर भगवानके सिरसे वार दीं। उसके पश्चात भगवानने वस्त्र पहिन लिये। भगवानको आसनपर बिठलाकर उनकी पूजा की गयी। सभीको चंदनका तिलक लगाया गया। पुनश्च सभीके सिरपरसे कुछ वस्तुएँ वार दी गयीं। भगवानको वीड़ा और भक्तजनोंको पान दिये गये। भगवानने सबको पान खानेकी आज्ञा दी। सबने पान खाये। उतनेमें अरुणोदय हो जानेपर बाइसाजीने दैनिक पूजाअवसर किया। बादमें भगवान विहरणके लिये चले गये और महदाइसा भोजन बनानेमें लग गयी ।

विहरणसे भगवानके लौटनेपर महदाइसाने पूजाअवसर किया। भगवानके लिये थाल और भक्तोंके लिये पत्तलें परोसी गयीं। भगवानके साथ बैठकर सब भक्तजनोंने भोजन किया। इस प्रकार दीपावली मनायी गयी ।

🙏 जय श्री कृष्ण जी 🙏
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स्वामींचा परिवार

🙏 दंडवत प्रणाम 🙏

जय श्री चक्रधर स्वामी जी
स्वामींचा परिवार तीन प्रकार चा होता:
१) दर्शनीय।
२) बोधवंत (ग्यानी पुरूष तथा भक्त)।
३) अनुसरलेला एकून स्वामीचा परिवार १३५ होता। तो येणे प्रमाणे।

भक्त:
१) पैठनची नागुबाई उर्फ बाईसा
२) वरंगलचे माघव भक्त ब्राह्मण।

बोधवंत (ग्यानी पुरूष):
१) श्री नागदेवाचार्य २) शांतबाईसा ३) महादाईसा ४) म्हाइंभट ५) दायंबा
६) देमाईसा ७) छर्दोबा ८) खेईगोई ९) गोईबाई १०) जोनोउपाध्ये
११) नीळभट भांडारेकार १२) नाथोबा १३) चांगदेव भट

अनुसरलेली:
१) भट (नागदेवाचार्य) २) नीळभट ३) शांताबाईसा ४) महादाईसा ५) म्हाइंभट
६) साधा ७) आऊसा ८) आबाईसा ९) नाथोबा १०) पोमाईसा
११) खेईबाईसा १२) गोईबाईसा

दर्शनीय:
१) रामदेव विद्यावंत वडनेतर २) सारंग पंडित ३) इंद्रभट ४) संतोष ५)अवडळभट
६) अवघूत ७) मार्तंड ८) परसनायक ९)प्रद्न्यासागर १०) माइताहरी
११)घुईनायक १२) रेनाईक १३) गदोनायक १४) पद्मनाभी १५) नागदेव उपाध्ये
१६)राके लक्छमींद्रभट १७) काकोस १८)आनो १९) खळो २०) गोंदो
२१) जपिय विष्णुभट २२) भ्रिंगी २३) वैजोबा २४) काळदासभट २५)वामन
२६) मतिविळासभट २७) नागनायक (डोमेग्राम) २८) भाईदेव २९) उपासनीये ३०) काळबोटे
३१) साईदेव ३२) कान्हो उपाध्ये ३३) काळेवासनायक ३४) गोरे जानोपाध्ये ३५) एकाईसे दोन
३६) देमाईसा ३७) लखुबाईसा ३८) सोभागा ३९) यल्हाइसा ४०) भूतानंद
४१) सामकोसे ४२) ललीताइसा ४३) एकाविराबाईसा ४४) द्रविळाबाईसा ४५) रत्नमाणिका
४६) आबयो ४७) माळी (वडेगाव) ४८) कमळनायक ४९) राणाइसा (रामदेव विद्यावंताची माता) ५०) तथा रामदेवाची शिष्या राणाइसा
५१) वामदेव पैठणकर ५२) बोनुबाया ५३) मेहकरकर बोनु बाइया ५४) प्रंपच विस्मृति घाटे हरिभट ५५) तिवाडी
५६) तथा त्याची पत्नी ५७) ग्रह सारंगपाणी ५८) तथा त्याची माता ५९) महादेव पाठक ६०) महादेव रावसगावकर
६१) तिकवनायक हिरवळीकर ६२) वायनायक रावसगावकर ६३) राहिया (पाटोदा) ६४) गोविंदस्वामी ६५) सारस्वत भट बीडकर
६६) कनासीचा ब्राह्मण ६७) सिंदुर्जनाचा ब्राह्मण ६८) मोसोपवासिनी ६९) राघवदेव ७०) कुंडी कनहरदेव
७१) महादेवोराजा ७२) पाल्हाडांगिया ७३) कास्त हरिदेव पंडित ७४) गोपाळ पंडित पारधी निरोपनीचे ७५) साळीवाहन
७६) राऊत दोघे ७७) मातंग ७८) देईभट तांबुळ ग्रहनीचे ७९) भोग नारायण माय धुवा ८०) मायधुवा
८१) दाको ८२) गणपत आपयो सराळेकर ८३) सुयराची बाई ८४) गोवारीया ८५) पंचगंगा ब्राह्मण
८६) सुकिये जोगनायक ८७) पाठक ८८) यंत्राकार वासुनायक ८९) भाऊ तिकवनायक ९०) गुर्जर दोन्ही
९१) नागा राऊळ ९२) मुंजिया बहिनी ९३) छायागोपाळीची स्त्री ९४)मार्तंड विहिरीचा ब्राह्मण ९५) पाठक देगाऊबाई
९६) वरंगलकर हंसाबाई ९७) घोगरगावकर बाई ९८) धानाई अळजपुर ९९) रामदरणेयाची माता १००) मुक्ताबीई
१०१) रोहेरीचा ब्राह्मण १०२) भोगनारायण ब्राह्मण १०३) ठाकूर मार्या १०४) मल्ल (जोगवटा दान देणारा) १०५) स्वामींनी ज्याला जोगवटा दिला तो ब्राह्मण
१०६) नारोबा १०७) नांदेड येथील गोरक्छण ब्राह्मण १०८) हेडाऊ (आऊसा जवळील डांगरेस नावाचा कुत्रा स्वामींचा भक्त होता)
।। श्रीचक्रधरार्पणम् ।।

🙏 जय श्री कृष्ण जी 🙏
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उत्तरार्ध लीला क्रमांक 206 | लीला...

🙏 दंडवत प्रणाम 🙏

जय श्री चक्रधर स्वामी जी
किसी दिन सुबह का पूजा अवसर हो जाने के बाद भगवान जी छिन्नस्थली स्थान की तरफ गए! गुफा में आकर महाराज ने नाथोबा और नागदेव जी के सिर आपस में मिला दिए और स्थिति सुख अनुभव करवाया! स्वयं वापिस लौट आए तो बाईसा माताजी ने उन दोनों के विषय में पूछा! तब भगवान जी ने कहा, वे दोनों आपस में भिड़े हुए हैं! जाओ उन्हें ले आओ! बाईसा माताजी नाथोबा और नागदेव जी को बुला लाई! उन दोनों ने आकर स्थिति सुख का आनंद लेने के विषय में भगवान जी को बताया! स्वामी जी कहने लगे, अभी तो हमसे प्राप्त हुआ स्थिति सुख आपको इतना आनंद दे रहा है तो सोचो हमारा परमानंद आपको कितना प्रफुल्लित करेगा! इसका आपको आभास भी नहीं है!

बोलिए श्री चक्रधर स्वामी जी की जय
।। श्रीचक्रधरार्पणम् ।।

🙏 जय श्री कृष्ण जी 🙏
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वज्री की लीला

🙏 दंडवत प्रणाम 🙏

जय श्री चक्रधर स्वामी जी
बेलापुर के आदित्य मंदिर का आँगन। प्रातःकाल का समय। महदाइसा को कुछ घिसने की आवाज़ सुनाई पड़ती है। उत्सुकता से भर वह बाहर आकर देखती है।

क्या देखती है कि सर्वज्ञ श्रीचक्रधर स्वामी दोनों श्रीचरणों में टिकाए एक पत्थर पर एक काले रंग की ईंट (वज्री) को घिस रहे हैं। अपने उत्तरीय से वे अपना शीर्ष ढंके हुए हैं। अंगिए की बाँहें उन्होंने ऊपर की हुई हैं।

कुतूहल से भर महदाइसा निकट आ खड़ी होती है। चुपचाप। स्वामीजी व्यस्त हैं। उनके मस्तक पर पसीने की बूँदें उभर आई हैं। सूर्य की किरणें उन पर पड़ रही हैं।

महदाइसा को कुछ समझ नहीं आती कि स्वामीजी क्या कर रहे हैं? वह जाती है और जाकर नागदेव को बुला लाती है।

कुछ घिस जाने पर स्वामीजी उस वज्री को उलटपलट कर देखते हैं। सही हो गई कि नहीं? सही न पा उसे फिर घिसने लगते हैं।

जब महदाइसा-नागदेव को कुछ समझ नहीं पड़ा तो उनसे रहा नहीं गया। महदाइसा ने तन्मयता भंग करते पूछ ही लिया, 'जी जी: यह आप क्या कर रहे हैं?' पीछे मुड़ स्वामीजी बोले, 'बाई, यह हमने एक वज्री गढ़ी है!

वज्री अर्थात् वारितुरंग। जल में तैरनेवाला घोड़ा, जो पानी से घिरे द्वीप में रहता है और उसमें तैर लेता है। डूबता नहीं। उसे वारितुरंग कहते हैं। उसी की तरह हमने अपने हाथों यह वज्री गढ़ी है। यह सदा पानी में तैरती रहेगी। कभी डूबेगी नहीं।

यह कहते स्वामीजी ने वह वज्री सामने करते दोनों को दिखाई

बरसों बाद महदाइसा ने इसी अनुपम लीला का स्मरण करतेकरते नौगाँव में अपने अंतिम श्वास छोड़े।

ऐसा दृढ़ विश्वास है कि इस लीला का नित्य स्मरण जीव को अवश्यमेव इस संसार-सागर से पार करा देता है। जन्ममरण के चक्र से मुक्त करा देता है।

प्रतिदिन प्रातःकाल के स्मरण में इस फलदायक लीला को अवश्य अपने ध्यान में लाएँ।

सर्वज्ञ श्रीचक्रधर स्वामी की सदा ही जय हो!
।। श्रीचक्रधरार्पणम् ।।

🙏 जय श्री कृष्ण जी 🙏
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श्री दत्तात्रेय प्रभुंचे १० वेष

🙏 दंडवत प्रणाम 🙏

श्री दत्तात्रेय प्रभुंचे १० वेष:
१) रूषी वेष
२) बाल वेष
३) मातंग वेष
४) ब्राम्हण वेष
५) गोंधळी वेष
६) कुष्टी वेष
७) व्याघ्र वेष
८) अवधुत वेष
९) पारधी वेष
१०) दिगंबर वेष

शकोणत्या वेषाने कोणाला भेट दिली:
१) रूषी वेष – सहस्त्रार्जुन
२) बालवेष – अनुसूया , पार्वती , लक्ष्मी ,सावित्री
३) मातंग वेष – अर्ळक राजा
४) ब्राह्मण वेष – रेणुकेचा निक्षेप करते वेळेसपरशुरामाला
५) गोंधळी वेष- डखले , चांगदेवभट
६) कुष्टी वेष – सप्त रूषी
७) व्याघ्र वेष – चक्रपाणि महाराज
८) अवधुत वेष – यदुराजा , मदाळसाराणी
९) पारधी वेष – परशुराम
१०) दिगंबर वेष – शंकराचार्य

🙏 जय श्री कृष्ण 🙏
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