परशुराम जी को दर्शन

  • Author: Dandvat
  • Posted on: 2023-11-12 18:00:00
  • Tags: Leela, Shree Dattatreya Prabhu, Panch Krishan Avatar
  • Post ID: 1699792200

🙏 दंडवत प्रणाम
नमो पंच कृष्ण अवतार



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नमो पंच कृष्ण अवतार - Read the leelas of Mahanubhava Pantha. Go to Leelas

परमेश्वराचे प्रेमदानास प्राप्त झा...

🙏 दंडवत प्रणाम 🙏

नागूबाई पैठणकर (बाईसा) - परमेश्वराचे प्रेमदानास प्राप्त झालेली परमेश्वर सेवक बाईसा
– गोदावरीच्या काठावर बसलेल्या पैठण शहराची निर्मीती शालिवाहन राजा याने केली
– याच शालीवाहन राजाने मराठी शके सुरू केली …तेव्हापासून शालीवाहन शके असे म्हणतात
– या पैठण नगरी मध्ये थोर संत महंत ज्योतीषी रहात होते
– या शहरात न्याय निवाडा करण्याचे काम चालत असत
– येथील लोक वैदिक कर्मकांडात गुंतलेले होते
– नागूबाई या बालविधवा
– व्रत वैकल्ये करून जीवन व्यतीत करीत होत्या
– त्यांनी शैवपंथाच्या सुमूर्ताबाई यांना गुरू केले व त्यांची पुजा अर्चा करू लागल्या
– त्या कालवश झाल्यावर त्यांच्या जागेवर नागूबाई बसल्या व शीष्यांकरवी स्वतःची पुजा अर्चा करू लागल्या
– स्वामी त्र्यंबकेश्वरला जाण्यासाठी निघाले असता पैठणला आले
– बाजारामध्येच स्वामींची भेट झाली
– नागूबाई यांनी स्वामींना आपल्या सोबत गुंफेमध्ये आणले
– बसायला पाय पुसणी आणी भोपळ्याच्या करंटीमध्ये पाणीभात (पाण्यात भीजवलेले वाळलेल्या भाकरीचे तुकडे) दिला
– दोन दिवसांचा स्वामींचा क्रम असा असे… नागूबाई यांच्याकडे जेवण आणी भोगनारायण मंदिरात निद्रा
– नागूबाई स्वामींना बसायला पायपुसणी देत वा स्वतः उच्च आसनावर बसून भक्तांच्या कडून स्वतःची पुजा अर्चा करीत असत
– तिसऱ्या दिवशी नागूबाई यांची पुजा सुरू असताना त्यांची व स्वामींची नजरानजर झाली. क्रूपाद्रूष्टिने जीव ईश्वर भाव उमटविला
– श्रेष्ठत्व, वयोवृद्धत्व, तपोवृद्धत्व हे तिन दोष नाहिसे केले
– नागूबाई यांचे अंतःकरण पोळले. त्यांनी स्वामींना उच्च आसनावर बसवून पुजा अर्चा केली
– त्यांनी शेवट पर्यंत स्वामींची त्रीकाळ (सकाळ, दुपार , संध्याकाळ ) पुजा अर्चा केली
– मंगल आरतीची सुरवात त्या अशा पध्दतीने करत - जयतु मंगल मंगला परम मंगलरूपा
– पुजा करीत असताना त्यांना अष्ट भाव प्रकटे… थर थर कापणे, रोमांच उभे रहाणे, अश्रूधारा, स्वर भंग, रंग पालटे, ताठपणा येई, घाम सुटे, स्तब्धता येई…. मग स्वामी म्हणत… बाईसांच्या हातातील पालमांडे घ्या
– बाईसा असे नामकरण स्वामींच्या सन्निधानी आल्यावर झाले
– स्वामींना गरम पाणी देणे, आरोगणा (जेवण), व्याळी (रात्रीचे जेवण), स्वामींकरीता आसन टाकणे, रात्री शयनासन टाकणे इ. नित्य सेवा त्या करीत
– भक्तजनांवर माते सारखे प्रेम त्या करीत… स्वामींनी कुणाला शीक्षा केल्यास त्या मध्यस्थी करत
– सर्व भक्त जण बाईसांना विचारूनच स्वामींना उपहार वगैरे करीत
– जैसे मासे पाण्या शीवाय राहू शकत नाहीत तसे बाईसा आमच्याशीवाय राहू शकत नाहीत. .. असे स्वामी म्हणत
– या थोर माऊलीने स्वामींच्या वियोगाने बोटीतून उडी टाकून देहत्याग केला
सदर माहिती संग्रहावरून उपलब्ध झालेली आहे, काही चुकीचे असलेल्या गोष्टी बदल माफ करावी

🙏 जय श्री कृष्ण 🙏
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स्वामींचा परिवार

🙏 दंडवत प्रणाम 🙏

जय श्री चक्रधर स्वामी जी
स्वामींचा परिवार तीन प्रकार चा होता:
१) दर्शनीय।
२) बोधवंत (ग्यानी पुरूष तथा भक्त)।
३) अनुसरलेला एकून स्वामीचा परिवार १३५ होता। तो येणे प्रमाणे।

भक्त:
१) पैठनची नागुबाई उर्फ बाईसा
२) वरंगलचे माघव भक्त ब्राह्मण।

बोधवंत (ग्यानी पुरूष):
१) श्री नागदेवाचार्य २) शांतबाईसा ३) महादाईसा ४) म्हाइंभट ५) दायंबा
६) देमाईसा ७) छर्दोबा ८) खेईगोई ९) गोईबाई १०) जोनोउपाध्ये
११) नीळभट भांडारेकार १२) नाथोबा १३) चांगदेव भट

अनुसरलेली:
१) भट (नागदेवाचार्य) २) नीळभट ३) शांताबाईसा ४) महादाईसा ५) म्हाइंभट
६) साधा ७) आऊसा ८) आबाईसा ९) नाथोबा १०) पोमाईसा
११) खेईबाईसा १२) गोईबाईसा

दर्शनीय:
१) रामदेव विद्यावंत वडनेतर २) सारंग पंडित ३) इंद्रभट ४) संतोष ५)अवडळभट
६) अवघूत ७) मार्तंड ८) परसनायक ९)प्रद्न्यासागर १०) माइताहरी
११)घुईनायक १२) रेनाईक १३) गदोनायक १४) पद्मनाभी १५) नागदेव उपाध्ये
१६)राके लक्छमींद्रभट १७) काकोस १८)आनो १९) खळो २०) गोंदो
२१) जपिय विष्णुभट २२) भ्रिंगी २३) वैजोबा २४) काळदासभट २५)वामन
२६) मतिविळासभट २७) नागनायक (डोमेग्राम) २८) भाईदेव २९) उपासनीये ३०) काळबोटे
३१) साईदेव ३२) कान्हो उपाध्ये ३३) काळेवासनायक ३४) गोरे जानोपाध्ये ३५) एकाईसे दोन
३६) देमाईसा ३७) लखुबाईसा ३८) सोभागा ३९) यल्हाइसा ४०) भूतानंद
४१) सामकोसे ४२) ललीताइसा ४३) एकाविराबाईसा ४४) द्रविळाबाईसा ४५) रत्नमाणिका
४६) आबयो ४७) माळी (वडेगाव) ४८) कमळनायक ४९) राणाइसा (रामदेव विद्यावंताची माता) ५०) तथा रामदेवाची शिष्या राणाइसा
५१) वामदेव पैठणकर ५२) बोनुबाया ५३) मेहकरकर बोनु बाइया ५४) प्रंपच विस्मृति घाटे हरिभट ५५) तिवाडी
५६) तथा त्याची पत्नी ५७) ग्रह सारंगपाणी ५८) तथा त्याची माता ५९) महादेव पाठक ६०) महादेव रावसगावकर
६१) तिकवनायक हिरवळीकर ६२) वायनायक रावसगावकर ६३) राहिया (पाटोदा) ६४) गोविंदस्वामी ६५) सारस्वत भट बीडकर
६६) कनासीचा ब्राह्मण ६७) सिंदुर्जनाचा ब्राह्मण ६८) मोसोपवासिनी ६९) राघवदेव ७०) कुंडी कनहरदेव
७१) महादेवोराजा ७२) पाल्हाडांगिया ७३) कास्त हरिदेव पंडित ७४) गोपाळ पंडित पारधी निरोपनीचे ७५) साळीवाहन
७६) राऊत दोघे ७७) मातंग ७८) देईभट तांबुळ ग्रहनीचे ७९) भोग नारायण माय धुवा ८०) मायधुवा
८१) दाको ८२) गणपत आपयो सराळेकर ८३) सुयराची बाई ८४) गोवारीया ८५) पंचगंगा ब्राह्मण
८६) सुकिये जोगनायक ८७) पाठक ८८) यंत्राकार वासुनायक ८९) भाऊ तिकवनायक ९०) गुर्जर दोन्ही
९१) नागा राऊळ ९२) मुंजिया बहिनी ९३) छायागोपाळीची स्त्री ९४)मार्तंड विहिरीचा ब्राह्मण ९५) पाठक देगाऊबाई
९६) वरंगलकर हंसाबाई ९७) घोगरगावकर बाई ९८) धानाई अळजपुर ९९) रामदरणेयाची माता १००) मुक्ताबीई
१०१) रोहेरीचा ब्राह्मण १०२) भोगनारायण ब्राह्मण १०३) ठाकूर मार्या १०४) मल्ल (जोगवटा दान देणारा) १०५) स्वामींनी ज्याला जोगवटा दिला तो ब्राह्मण
१०६) नारोबा १०७) नांदेड येथील गोरक्छण ब्राह्मण १०८) हेडाऊ (आऊसा जवळील डांगरेस नावाचा कुत्रा स्वामींचा भक्त होता)
।। श्रीचक्रधरार्पणम् ।।

🙏 जय श्री कृष्ण जी 🙏
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श्री गोविन्द प्रभु महाराज जी के द...

🙏 दंडवत प्रणाम 🙏

गोविन्द प्रभु भगवान जी के अवतारोत्सव पर हम जितने पदार्थ बनने में सक्षम है उतने पदार्थ बना का प्रभु जी को को भोग लगाना चाहिए।
1 - लाख की भाकर, गुड़ की रोटियां, दलिया
2 - दही दूध और माखन, श्री खंड, गुलाब जामुन
3- पकोड़े (बुड़ुदे), धिडरे (बेसन से बना हुआ पुडा), काजू
4 - गुड़, गुड़ और भुने चने, कच्चे ज्वार के दाने
5 - देसी घी, मक्खन, गुड़ और देसी घी से बनी सेवइयां
6 - मीठी ककड़ी, दही भल्ले, खीर
7 - बैंगन की सब्जी, साग
8 - तरबूज, बेर, संतरे, आम का रस
9 - आउसा जी का प्रसिद्ध हलवा

इत्यादि पदार्थ भगवान जी को अच्छे लगते थे।

🙏 जय श्री कृष्ण 🙏
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कामाख्या के निमित्त देह त्यागना

🙏 दंडवत प्रणाम 🙏

जय श्री चक्रपाणि प्रभु जी
कौलि नामक ग्राम में एक हट योगिनी रहा करती थी जिसका नाम था कामाख्या, उसने अपने सौन्दर्य तथा अपने हाव् भाव से अनेक साधु संतो को अपने तप मार्ग से प्रवृत्त किया था। श्री चक्रपाणि महाराज जी के सामर्थ की परिस्थिति सुन बह भी वह आ पहुंची। अपने रंग रूप और हाव् भाव से वो प्रभु जी पर डोरे डालने लगी। श्री चक्रपाणि महाराज जी ने ब्रह्मचर्य धारण किआ था और प्रभु जी अपनी गुफा में ही ध्यान लगाए बैठे थे। कामाख्या गुफा में प्रवेश करना चाहती थी परन्तु बह प्रभु जी द्वारा श्री दत्तात्रय प्रभु जी की दी हुई कसम के कारन अंदर ना जा सकी।
कामाख्या गुफा के भर से ही अनेक प्रकार की स्तुति और प्राथना करती रही और अपने हाव् भाव से कोशिश करती रही परन्तु कोई भी प्रभु जी असर न पड़ा और बह अपने मार्ग से हुए। इसी प्रकार ७ दिन बिट गए और कामाख्या गुफा के दरवार में बैठी रही। अंत में श्री चक्रपाणि जी ने योग सामर्थ्य से अपना देह त्याग दिया। सातवे दिन कामाख्या ने गुफा में प्रवेश किआ तो देखा की प्रभु जी अपना शरीर छोड़ चुके थे। प्रभु जी की प्रसंशा करते हुए उसने खा की अनेक प्रकार के महा पुरषो को अपने वश करा मेने किन्तु प्रभु जी सामर्थ्यवान थे अंत अपने शरीर का त्याग किया।
।। जय श्री चक्रपाणि महाराज जी ।।

🙏 जय श्री कृष्ण जी 🙏
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एक दिन महदाइसा ने श्री चकर्धर स्व...

🙏 दंडवत प्रणाम 🙏

सर्वज्ञ श्री चक्रधर स्वामी जी ने उत्तर दिया, महदाइसा! जब भगवन श्री कृष्ण जी राजा कंस का वध करके कारागर की ओर जाने लगे तो वहा देखा की उद्धव देव भयभीत स्तम्भ के पीछे खड़े थे।
श्री कृष्ण जी ने उन्हें छिपा देख कर कहा, अरे! वहा कूँ खड़ा है। उतर देते हुए अन्य सेवक ने कहा। प्रभु जी वहा पर राजा कंस के प्रधान मंत्री है। तत्काल उद्धव ने कहा, प्रभु जी में अपनी बुद्धि से कुछ मंत्रणा कंस के समुख रखा करता था। तब प्रभु जी ने कहा, आपने आजतक कंस का अमात्यतव सवीकारा था, अब आजसे आप हमारा मंत्रितब धारण करो ओर हमे मंत्रणा दिया करो।
प्रभु जी के इन्ही वचनों के साथ उद्धव देव को प्रेम संक्रमण हुआ ओर उन्होंने प्रभु जी को सहस्तांग दंडवत प्रणाम कर, खुदको धन्य माना|

🙏 जय श्री कृष्ण जी 🙏
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उत्तरार्ध लीला क्रमांक 206 | लीला...

🙏 दंडवत प्रणाम 🙏

जय श्री चक्रधर स्वामी जी
किसी दिन सुबह का पूजा अवसर हो जाने के बाद भगवान जी छिन्नस्थली स्थान की तरफ गए! गुफा में आकर महाराज ने नाथोबा और नागदेव जी के सिर आपस में मिला दिए और स्थिति सुख अनुभव करवाया! स्वयं वापिस लौट आए तो बाईसा माताजी ने उन दोनों के विषय में पूछा! तब भगवान जी ने कहा, वे दोनों आपस में भिड़े हुए हैं! जाओ उन्हें ले आओ! बाईसा माताजी नाथोबा और नागदेव जी को बुला लाई! उन दोनों ने आकर स्थिति सुख का आनंद लेने के विषय में भगवान जी को बताया! स्वामी जी कहने लगे, अभी तो हमसे प्राप्त हुआ स्थिति सुख आपको इतना आनंद दे रहा है तो सोचो हमारा परमानंद आपको कितना प्रफुल्लित करेगा! इसका आपको आभास भी नहीं है!

बोलिए श्री चक्रधर स्वामी जी की जय
।। श्रीचक्रधरार्पणम् ।।

🙏 जय श्री कृष्ण जी 🙏
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